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Wheels of Joy, आइये जाने चलते फिरते लाइब्रेरी के बारे में

The अख़बारकोलकाता के रेडलाइट एरिया बीके पाल पार्क में मिनीवैन को देखते ही छोटे-छोटे बच्चो के चेहरे खुशी से खिल उठे। यह कोई साधारण मिनीवैन नहीं था, क्योंकि इसे रंगबिरंगी बच्चों की किताब के साथ तैयार किया गया था,जिसे नाम दिया गया "Wheels of Joy"

यह निश्चित रूप से उस क्षेत्र के बच्चों के लिए एक अनूठा अनुभव था, जिनके लिए स्टोरीबुक पढ़ पाना एक काफी कठिन परीक्षा है। मोबाइल लाइब्रेरी Wheels of Joy का शुभारंभ भारत में सेक्स-ट्रैफिकिंग को खत्म करने की दिशा में काम करने वाली एक एनजीओ, एप एड वूमेन वर्ल्ड द्वारा किया गया था, जो 20 जनवरी को एपीजे कोलकाता साहित्यिक समारोह में  एपीजे चिल्ड्रन लाइब्रेरी और कोल इंडिया के सहयोग से शुरू किया गया था। संजय ग्रुप के निदेशक प्रीति पॉल ने जहां खुद 500 किताबें दान की हैं।


एक समाचार ग्रुप से बात करते हुए, संगठन के संस्थापक रुचिरा गुप्ता ने कहा कि मोबाइल लाइब्रेरी Wheels of Joy यौनकर्मियों के बच्चों के जीवन में अधिक मूल्य जोड़ने का केवल एक प्रयास है जो सिर्फ मनोरंजन के अन्य स्रोतों तक सीमित नहीं हैं। बच्चे एक सप्ताह तक पढ़ने के लिए किताबें उधार ले सकते है। "यह अभ्यास बच्चों के बीच जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करेगा

Wheels of Joy, आइये जाने चलते फिरते लाइब्रेरी के बारे में


यह वैन Wheels of Joy सप्ताह में तीन बार सोनागाछी और किडरपोर के रेड लाइट इलाकों का दौरा करती है। यहाँ हम कहानीकार और स्वयंसेवकों के साथ जाते है जो कहानी सत्र का संचालन करने में मदद करते हैं। गुप्ता ने कहा, "कहानीकार कार्यक्रम के लिए बहुत सारे कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों ने साइन अप किया है।" इसके अतिरिक्त, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से हमारी संगठन को खुली जगह प्रदान की जाती है जिससे काफी मदद मिली है।

गुप्ता जी को लगता है कि शिक्षा ही एकमात्र साधन है जिसके द्वारा आज यौनकर्मियों के बच्चों को अंतर-जनजातीय वेश्यावृत्ति के दुष्चक्र से मुक्त किया जा सकता है। जबकि वह कोलकाता में इस तरह की पहल Wheels of Joy शुरू करने वाली पहली महिला हैं, संगठन ने पहले से ही यौनकर्मियों के बच्चों को शिक्षित करने में अपना समय लगाया है। संगठन के पास बच्चों के लिए कई अन्य पहलें भी हैं, जिसमें Books 4 Freedom initiative पहल शामिल है - जहां पुस्तकों का ज्ञान बच्चों को मुफ्त में मिलेगा।


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