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"छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश जी बघेल के नाम एक खुला पत्र"

• संदर्भ- कांकेर पत्रकार प्रताड़ना कांड,
• लेख - सुशील शर्मा (संपादक / प्रकाशक - बस्तर बंधु)

Theअख़बार
कांकेर : अभी हाल में ही कांकेर में वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की, जिसमें पुलिस के सामने असामाजिक तत्वों ने पत्रकार पर गलीगलौच के साथ जानलेवा हमला किया। छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा के लिए पहले ही सरकार ने चुनाव पूर्व वादा किया था, प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से आज तलक सरकार ने इसके लिए अब तक कोई खास कदम नहीं उठाया है।

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मार पिट की घटना ने पत्रकारों को झकझोर कर रख दिया है, जिसे हमने पहले भी हमने प्रकाशित किया है। कांकेर के ही वरिष्ठ पत्रकार ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को एक पत्र लिखा है, अवश्य पढ़े -
       
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
        आशा है, स्वस्थ सानंद होंगे तथा हम सब पत्रकारों के "कल्याण" की सोच रहे होंगे।
महोदय जी, छत्तीसगढ़ में भाजपा के 15 वर्षीय कुशासन के पश्चात एक नई आशा और विश्वास के साथ यहां की जनता ने आपको सत्तारूढ़ किया। आपसे और कांग्रेस से गरीब जनता ने बड़ी उम्मीदें लगा रखी थी, किंतु अत्यंत खेद के साथ लिखना पड़ रहा है कि बहुत ही शीघ्र लक्षण दिखाई देने लगे कि शासन वैसा ही रहेगा जैसा भाजपा के समय में था, अर्थात एक दमनकारी और बड़े-बड़े अत्याचारी, सेठ साहूकार, पूंजीपतियों का साथ देने वाली, पत्रकारों की सुरक्षा के नाम पर गोल-गोल बातें करने वाली सरकार, जैसी उस समय थी, वैसी ही कहीं यह भी ना हो जाए। यह आशंका उस समय सही मालूम होने लगी, जब आपने बड़े-बड़े पदों पर उन्हीं लोगों को सम्मान पूर्वक बिठा दिया, जो भाजपा शासन के खासमखास थे, साथ ही इन्हीं भ्रष्ट लोगों को आपने पदोन्नति देना भी प्रारंभ कर दिया, यही नहीं, चुनाव घोषणा पत्र में कांग्रेस पार्टी की ओर से किए गए वादों से आप मुकरते दिखाई दिए और फिर साफ-साफ दिखने लगा कि आपकी सरकार पूर्ववर्ती भाजपा शासन की ही लीक पर चली जा रही है । जहां तक पत्रकारों के दमन का प्रश्न है, इस मामले में भाजपा सरकार से आपकी सरकार मीलों आगे निकल गई, जिन्होंने भाजपा शासन के विरुद्ध कांग्रेस के पक्ष में लगातार लिखा और प्रकाशित किया था, उन्हें भी सताना शुरू कर दिया गया। सच कहा जाए तो भाजपा शासन के पिट्ठू पत्रकारों को कांग्रेस शासन में प्रोत्साहन ही मिला और खानदानी कांग्रेसी गांधीवादी लेखक, पत्रकार, बुद्धिजीवी आपकी सरकार के टारगेट में आ गए। हम यह नहीं कहते, यह सब आपके इशारे पर हुआ। हमारा सीधा आरोप आपकी सरकार के सिस्टम पर है जो कि भाजपा शासन से ज्यों का त्यों उठाकर कांग्रेसी शासन के कार्यालयों में सम्मान  के साथ रख दिया गया है। आपकी कृपा और आशीर्वाद से हम छत्तीसगढ़िया पत्रकार भी एकदम अनपढ़ या अनाड़ी नहीं है बहुत कुछ देखते और समझते हैं। (उन बातों को भी जिन्हें आपका या भाजपा का या किसी का भी शासन देख नहीं पाता या देख कर भी अनदेखी करता है)। बुरा ना मानें और प्रतिष्ठा का प्रश्न ना बनाएं तो एक कटुसत्य कहना चाहूंगा कि आपकी पार्टी में भी विगत कुछ वर्षों से चोरी चुपके अनेक फूल छाप कांग्रेसी भर्ती हो चुके हैं, जिनका एकमात्र और छिपा हुआ एजेंडा यह है कि कांग्रेस तथा उसकी सरकारों को बदनाम किया जाए। जिन पत्रकारों ने वर्षों की मेहनत से कांग्रेस की छवि बनाई है और भाजपा की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकने में भारी योगदान किया है, उन्हीं पत्रकारों को यह फूल छाप कांग्रेसी वर्तमान राज्य सरकार के विरुद्ध भड़का रहे हैं और आपके ही कुछ नेता तथा अधिकारी पत्रकारों के विरुद्ध ब्रिटिश शासन की तरह कदम उठाकर भाजपा को आपके विरुद्ध प्रचार का सुनहरा मौका दे रहे हैं। यदि इस सच्चाई को आप अपने इधर-उधर के तर्कों से झुठलाना चाहें तो फिर मुझे आपसे कुछ नहीं कहना है ।फिर भी इतना तो अवश्य निवेदन करूंगा कि पत्रकारों के विरुद्ध आपके पुलिस प्रशासन द्वारा जो भी अन्याय लॉ एंड ऑर्डर के नाम पर किया जा रहा है, उसे रोकिए अन्यथा आप की तथा आपकी सरकार की साथ ही कांग्रेस की भी छवि दिनों दिन खराब होगी। डैमेज कंट्रोल जिसे कहते हैं, वह विलंब के साथ और भी मुश्किल होता जाता है, यह आप जैसे कुशल राजनीतिज्ञ को बताने की आवश्यकता नहीं है। आप जिनके परामर्श से कोई कदम उठाते हैं, उनका इतिहास क्या है ? इसकी सूक्ष्म जानकारी प्राप्त करें तो आप ही का भला होगा। साथ ही यह भी पता लगाइए कि  वर्तमान में यह जो दमन पत्रकारों पर आपके पुलिस प्रशासन द्वारा किया जा रहा है, वह कहां तक सही है ? पत्रकारों का विगत विधानसभा चुनाव में किधर झुकाव था ? इतना सब जानना आपके लिए कोई बहुत मुश्किल नहीं है और इससे दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है।
आशा है, हमारे द्वारा सच्चे और साफ हृदय  से दी गई सच्ची सलाह पर आप ध्यान पूर्वक विचार करेंगे तथा अतिशीघ्र न्याय पूर्ण निर्णय लेंगे। पत्रकारों का गुस्सा चरम पर है, 11अक्टूबर को जो पत्रकार न्याय यात्रा का आव्हान किया गया है उसे अपेक्षा से कहीं ज्यादा समर्थन प्राप्त हो रहा है, इसका परिणाम हमारे साथ साथ आप भी देखेंगे ही देखेंगे। अच्छा होगा तत्काल पत्रकारों की तमाम न्यायोचित मांगों को मान लिया जाए और सरकार की विद्रुप होती छवि को बचा लें, बना लें।
भवदीय

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सुशील शर्मा
संपादक /प्रकाशक
बस्तर बन्धु
काँकेर

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