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भारत की प्रतिक्रिया/ एक और द्विपक्षीय वार्ता करना चाहता है चीन


भारत को निमंत्रण/ एक और द्विपक्षीय वार्ता करना चाहता हैचीन

The अख़बार: भारत चीन रिश्ते में आये उतार-चढ़ाव की पूरी कहानी

भारत

चीनी विदेश मंत्री वांग यी


चीन के विदेश मंत्री वांग यी नें बीजिंग में बेल्ट एंड रोड समिट पर प्रेस वार्ता की. जिसमें उन्होनें कहा कि चीन भारत के साथ रिश्ते सुधारनें के लिए पिछले वर्ष की तरह वुहान वार्ता जैसा द्विपक्षीय शिखर वार्ता करना चाहता है. इस वर्ष चीन अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड को दुनिया के सामनें रखनें के लिए दूसरी बार सम्मलेन का आयोजन दर रहा है. जो 25 से 27 अप्रैल तक होगा. इस परियोजना के लिए दुनिया में मतभेद की स्थिति पैदा हो रही है.

चीन की परियोजना दुनिया के लिए खतरा: माइक पोम्पियो

भारत

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और  अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयी

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयी नें चीन द्वारा बेल्ट एंड रोड परियोजना को दुनिया के लिए खतरनाक बताया. उन्होनें एक साक्षात्कार में कहा की चीन इन परियोजनाओं के द्वारा राष्ट्रों की सिमागत सुरक्षा प्रणाली को ध्वस्त करना चाहता है. इससे पहले भारत नें भी चीन-पाक आर्थिक गलियारा (सी.पी.ई.सी.) परियोजना पर विरोध जताया है, जिसमें उनकी परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजर रही है. इस तीन हजार किलोमीटर की सी.पी.ई.सी. परियोजना का मकसद चीन और पाकिस्तान को रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क से जोड़ना है.

 

भारत

परधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग

पिछले साल चीन के वुहान में मिले प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग

चीन का विख्यात वुहान शहर ‘यागत्से नदी’ के किनारे बसा शहर है, ये शहर नदी में बनें तीन बांधों के कारण भी विख्यात है। प्रधानमंत्री मोदी नें अब तक चीन के मध्य भाग का दौरा कभी नहीं किया था जिसके कारण उन्हें मध्यवर्ती ‘वुहान’ में आमंत्रित किया गया था।

प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी की चीन की चौथी यात्रा थी लेकिन इससे पहले दोनों नेता कभी ऐसी 'अनौपचारिक शिखर वार्ता' के लिए नहीं मिले थे.

नरेंद्र मोदी इससे पहले एक बार द्विपक्षीय वार्ता के लिए, 2016 में जी-20 सम्मेलन और 2017 में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन गए थे.

कौन से मुद्दें हैं जिन पर भारत और चीन में वैचारिक मतभेद हैं

1. चीन ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत के दाखिल होने का विरोध किया.

2. जैश ए मोहम्मद के नेता मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र के जरिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश को भी चीन ने तीन बार वीटो किया था.

चीन के वीटो के बारें में जानने के लिए click करें

3. इससे पहले भूटान सीमा पर डोकलाम में दोनों देशों के बीच करीब 73 दिन तक सीमा विवाद के कारण अशांति बनी रही.

 

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