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जाँच समिति के रिपोर्ट आधार पर कांकेर पत्रकार विवाद मामले में सरकार की बड़ी कार्यवाही

रायपुर।कांकेर पत्रकार विवाद मामले पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांकेर के पुलिस निरीक्षक जवाहर गायकवाड़ और थाना प्रभारी मोरध्वज देशमुख का ट्रांसफर कर दिया गया है.

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इसके पहले सरकार द्वारा गठित पत्रकारों के उच्च स्तरीय जांच दल ने आज अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उनके आवास में मिलकर सौंपी. कमेटी ने चार मुख्य सिफारिशें की हैं जिसमें पत्रकार सुरक्षा कानून जल्द से जल्द लागू करने, कानून व्यवस्था के मामले में कांकेर के एसपी की भूमिका पर सवाल, मामले में और गंभीर धाराएं जोड़ने तथा नेताओं की गुण्डागर्दी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है.

कमेटी ने मीडिया के लिए सिफारिश करते हुए कहा कि एक पत्रकार के तौर पर कमल शुक्ला और सतीश यादव ने अपनी लक्ष्मणरेखा पार की और सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की जिससे इस विवाद ने जन्म लिया. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मीडिया को अपना दायित्व और दायरा की सीमारेखा नही भूलनी चाहिए.

जानते चलें कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 20 सालों के अंदर पत्रकारों का उच्च स्तरीय जांच दल बनाया गया था जिसे कांकेर पत्रकारों के साथ हुई दुरव्यवहार वाली घटना की जांच करके सरकार को प्रतिवेदन सौंपना था. इसलिए कमेटी की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था. विशेषकर पीड़ित पत्रकार, घटना के आरोपियों तथा प्रशासन को भी इसका इंतजार था.


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बस्तर आईजी को भेजी गई रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक को जांच रिपोर्ट भेजते हुए इसका परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. पत्रकारों के उच्च स्तरीय जांच दल के अध्यक्ष नवभारत के संपादक राजेश जोशी, जांच दल के सदस्य दैनिक आज की जनधारा के संपादक अनिल द्विवेदी, बस्तर इम्पेक्ट के संपादक सुरेश महापात्र, राष्ट्रीय हिंदी मेल की सहायक संपादक शगुफ्ता शीरीन और स्वराज्य एक्सप्रेस के संपादक रूपेश गुप्ता उपस्थित थे.

बस्तर आईजी ने गठित की SIT
इसी तरह बस्तर आईजी ने एक तीन सदस्यीय सिट कमेटी का गठन कर दिया है जो इस बात की जांच करेगी कि विगत 26 सितम्बर को हुई दो एफआईआर में कुछ और धाराएं जोड़ी जानी चाहिए कि नही.

कमेटी की सिफारिशें
उच्च स्तरीय जांच दल के अध्यक्ष राजेश जोशी ने कहा कि जांच दल ने घटना, घटना की प्रृष्ठभूमि, सभी पक्षों की संलिप्तता और भूमिका, एफआईआर और घटना का तथ्यात्मक विश्लेषण, पुलिस और प्रशासन की भूमिका तथा पब्लिक डोमेन में उपलब्ध सारे आरोपों की पड़ताल करते हुए न्यायपरक रिपोर्ट तैयार की है. उम्मीद है कि कमेटी ने जो सिफारिशें की हैं, सरकार उसे जल्द लागू करेगी.


1 सतीश यादव और कमल शुक्ला के साथ हुई मारपीट की घटना बेहद गंभीर किस्म की है, इसे ध्यान में रखते हुए मामले में और गंभीर धाराएं जोड़ने की जरूरत है.


2 पुलिस हालात को काबू करने में पूरी तरह विफल रही. शहर में धारा 144 लागू थी. तीन घण्टे तक 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी रही, मारपीट हुई, थाने में मौजूद स्टाफ से मामले को संभालने में गंभीर चूक हुई दिखती है. पुलिस अधीक्षक का घटनास्थल पर अंत तक नही पहुंचना उनकी संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.


3 पत्रकार सुरक्षा कानून जल्द से जल्द लागू किया जाए.


4 पत्रकार कमल शुक्ला और सतीश यादव के खिलाफ आरोपियों द्वारा थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर अपने बचाव के लिए करवाई गई है.


Team,
The अख़बार

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