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देश की 'युवा' पीढ़ी ये सुन लें एक बार, कृति - नीता झा


एक बच्चे का जन्म मतलब एक पूरे व्यक्तित्व का जन्म होता है। पहले माँ की कोख से अलग होना,फिर स्कूल के लिए कुछ समय दूर होना,फिर नौकरी, व्यवसाय के लिए कुछ कुछ समय के लिए अलग होना ही पड़ता है,  वैसे भी भारत जैसे विकासशील देश मे ताउम्र अपने परिजनों के सानिध्य में रहना धीरे धीरे मुश्किल होता जा रहा है। इसके कई फायदे भी हैं और कई नुकसान भी चूंकि नुकसान बड़े हैं अतः उसपर विचार करना जरूरी जान पड़ता है।
बच्चों को हर अभिभावक अच्छी से अच्छी परवरिश, शिक्षा देना चाहते हैं। उनकी हर सम्भव कोशिश होती है अपने बच्चे को बेहतर साधन सुविधाएं मुहैया कराएं और अधिकांश अभिभावक दोनों ही धनोपार्जन करते है इन्ही कारणों से बच्चों को वो क्वालिटी टाइम देने में असमर्थ होते हैं। जिसकी बच्चे को जरूरत होती है। कोई नही चाहता कि उनका बच्चा ज्ञानार्जन के छेत्र में कम हो जिस कारण उसको जीवन में कोई भी परेशानी हो वैसे भी हर इंसान को कभी न कभी अपने रास्ते पे अकेले चलना ही पड़ता है इसके फैसले उम्र नहीं आवश्यकता  पर आधारित होते हैं।
यही समय होता है जब बच्चे अकेलेपन में अपने व्यक्तित्व का किस तरह निर्माण करते हैं। अभिभावक अपनी कोशिश करते रहते हैं करना भी चाहिए समय समय पर उनको समझाइश, मार्गदर्शन देते रहना चाहिए बच्चे यदि उनकी भावनाओं की सही कद्र करते हैं तो निश्चित रूप से सम्मानिय और उपयोगी व्यक्ति बनते हैं जिनकी देश समाज को हमेशा जरूरत होती है।

father

मनुज आज फिर सोच रहा था,
यादों के तिनके जोड़ रहा था.
भरी बरसात में स्यामली संग
जब नेहा को स्कूल लेने गया था
कितने भीग चुके थे दोनों
पर नेहा को न भीगने दिया था
वो छतरी कितना भी थाम लेती
वर्षा का विकेट जो रूप भरा था
ऐसे ही तब भी दोनों उलझे जब
बजट से ऊपर शिक्षा का मार्ग चुना
गहने जेवर जमीन सभी वो वारे
जिनसे सीधे न पेट जुड़ा था
शिक्षा तो थी अलग व्यवस्था
विवाह के लिए भी कुछ जोड़ा था
पाई-पाई बचा रहे थे बड़े जतन से
बिटिया को भान तक न हुआ था
यही गलती थी शायद के
उसे इन संघर्षों का पता न था
सोच रखा था सब कह देंगे
जब वक्त सही जान पड़ेगा
पर मर्यादा के पर्दे के पीछे
महल स्वार्थ का पनप रहा था
टूटी सारी आशाएं उनकी जब
पढ़ती-बढ़ती अल्हड़ बिटिया ने
जीवनसाथी गलत चुन लिया
तार-तार होते सपनो पर फिर
झूठे शब्दों के नश्तर चुभा
छलनी सारा वज़ूद किया
स्वरचित,मौलिक रचना

नीता झा

 

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