छात्रावासों की अपनी अलग अलग कहानी

Category: छत्तीसगढ़ Written by वेदांत झा Hits: 397

जगदलपुर जनपद पंचायत लोहंडीगुड़ा के अंतर्गत आने वाले छात्रावासों में जिनमें बालक छात्रावास हो या कन्या आश्रम हो इन सभी जगहों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की स्थिति भिन्न भिन्न है। सभी को मालूम है कि दिसंबर माह में बच्चों की छमाही परीक्षा होने वाली है जिस हेतु सभी बच्चे परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं और सभी चाहते हैं कि इस परीक्षा में उनके मार्क्स अपने साथी सहपाठियों से अच्छे आएं, लेकिन कुछ छात्रावासों में एवं आश्रम शाला में बच्चे या यूं कहें देश के भविष्य नौनिहालों के साथ कुछ ज्यादती भी की जा रही है। ग्राम पंचायत तरागांव के छिंद बहार कलार पारा के बालिका आश्रम में अध्ययनरत बच्चों के साथ अधीक्षक का एवं उसके परिवार के लोगों के द्वारा बच्चों से अपने निजी काम करवाये जा रहें हैं, जिसका प्रमाण सहित वीडियो एवं फोटो प्रस्तुत है। इसी तरह ग्राम पंचायत अलनार के अंतर्गत बालक छात्रावास की हालत देखकर भी बच्चों के ऊपर तरस आता है, शाला के बच्चों ने अपनी आपबीती बताई, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो गए बच्चों ने प्राचार्य महोदय के सामने ही उन्हें जो हो रही समस्या के बारे में जानकारी दी।

बच्चों के कथा अनुसार छात्रावास अधीक्षक लगभग छात्रावास में रहते ही नहीं हैं । बच्चों ने बताया की भोजन भी स्तर हीन दिया जाता है और भोजन के समय में अधीक्षक तो रहते ही नहीं हैं और रसोईया या चपरासी भी कभी नहीं रहते वह भोजन बनाकर अपने घर चले जाते हैं, छात्रों ने बताया लगभग प्रतिदिन दाल चावल ही खिलाया जाता है नाश्ता कभी-कभार ही दिया जाता है नाश्ते में हमेशा पोहा ही दिया जाता है। कभी-कभी तो दाल कच्ची ही बनाकर परोस दी जाती है जिसे हमें जबरन खाना पड़ता है क्योंकि इसके अलावा कोई रास्ता ही नहीं रहता। ऐसे अधपके भोजन ग्रहण करने के कारण तबीयत बिगड़ जाती है जिसकी जानकारी अधीक्षक महोदय को देने के बाद भी वे इलाज कराने नहीं ले जाते जिससे कभी-कभी बहुत परेशानी भी होती है। छात्रावास में सबसे बड़ी समस्या पानी की है क्योंकि यहां पर ट्यूबवेल नहीं होने के कारण बाजू के यानी अपने ही हायर सेकेंडरी स्कूल के बाउंड्री के अंदर से पानी लाना पड़ता है एवं शौच के लिए हमेशा बाहर ही जाना पड़ता है जिससे सांप बिच्छू कीड़े मकोड़े आदि का डर हमेशा रहता है। छात्रावास में खेल सामग्री भी उपलब्ध नहीं है एवं छात्रावास बिल्डिंग नहीं जरूर बनी है लेकिन उसका निर्माण स्तर हिन हुआ है। छात्रों ने बताया की ना हमारे पास खेलने की सुविधा है और ना ही किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी करवाई जाती है हम लोग सिर्फ बाहरी लोगों के बारे में याने अन्य स्कूलों के बारे में सुनते हैं की फला स्कूल के बच्चे बाहर खेलने या सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने जाते हैं हमारी भी इच्छा होती है कि हम ऐसे आयोजनों में भाग ले लेकिन अधीक्षक महोदय के अड़ियल रवैया के कारण हम लोग कहीं नहीं जा सकते यह हमारा दुर्भाग्य है। इसी तरह अलनार में ही माध्यमिक कन्याआश्रम शाला भी है जहां की व्यवस्था काफी चुस्त दुरुस्त दिखी अधिकक्षिका एवं पूरा स्टाफ अपने छात्राओं के साथ तालमेल बनाए हुए दिखे और कुछ बच्चों ने तो सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अपने आप को शरीक बताया एवं गाना गाकर और प्रश्नों के जो कि काफी कठिन थे उनके उत्तर भी सटीक दिए। इस कन्या आश्रम में कुछ कमियां दिखी जिसमें पानी की समस्या तो थी ही एवं मात्र एक सुरक्षाकर्मी के भरोसे जो कि महिला है जिसे 24 घंटे ड्यूटी देनी पड़ती है काफी परेशानी होती होगी। प्रधानाध्यापिका महोदया ने बताया कि बच्चों को सुचारू रूप से पढ़ाने के लिए विषय वार शिक्षकों की कमी है यदि इस समस्या से निजात मिल जाती तो हमारा आश्रम हर क्षेत्र में नाम अवश्य कमाएगा। गुप्त परिस्थितियों को देखते हुए अब शासन प्रशासन को एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को भी इन विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर पूरे क्षेत्र में सही ढंग से संचालन करते हुए जो भी समस्याएं हैं उसका निराकरण जल्द से जल्द किया जाना चाहिए

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