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अमेरिका देने वाला है बड़ा झटका, GSP होगा ख़त्म


The अख़बार: अमेरिका देने वाला है बड़ा झटका, GSP होगा ख़त्म

मुख्य बिंदु :


१.  अमेरिकी बाजार में 5.6 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों पर पड़ेगा फर्क.

२. डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से यह भारत के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई होगी.

३. भारत और तुर्की के लगभग 2 हजार प्रोडक्ट हैं जो इसके प्रभाव में आएंगे.

नई दिल्ली: अमेरिका यूं तोपुलवामा में हुए आतंकी हमले और फिर पाकिस्तान में आतंकी अड्डों पर एयर स्ट्राइक के मसले पर भले ही भारत के साथ खड़ा नजर आया, मगर अब उसने आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका देने की तैयारी की है. इसके संकेत खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपने दिए हैं. उन्होंने व्यापार में भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस(GSP) से बाहर करने से जुड़ा बयान देकर वैश्विक आर्थिक गलियारे में नई हलचल पैदा कर दी है. ट्रंप ने इस बाबत अमेरिका की संसद यानी 'कांग्रेस' को बी बकायदा पत्र लिखकर सूचित कर दिया है.अगर ऐसा सचमुच में हुआ तो फिर अमेरिकी बाजार में 5.6 बिलियन डॉलर मूल्य के भारतीय उत्पादों के लिए ड्यूटी फ्री यानी शुल्क-मुक्त एंट्री का दरवाजा बंद हो जाएगा.

अमेरिका देने वाला है बड़ा झटका, GSP होगा ख़त्म

यह एक बड़ा आर्थिक झटका होगा. ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह भारत के लिए शुल्क मुक्त ट्रीटमेंट को खत्म करने का इरादा रखते हैं. बताया जा रहा है कि जीएसपी के तहत अगर भागीदारी समाप्त होती है तो 2017 में डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से यह भारत के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई होगी. 

क्या है जीएसपी?

जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस यानी जीएसपी अमेरिकी ट्रेड प्रोग्राम है जिसके तहत अमेरिका विकासशील देशों में आर्थिक तरक्की के लिए अपने यहां बिना टैक्स सामानों का आयात करता है. अमेरिका ने दुनिया के 129 देशों को यह सुविधा दी है जहां से 4800 प्रोडक्ट का आयात होता है. अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 1 जनवरी 1976 को जीएसपी का गठन किया था.

क्या है पूरी कार्रवाई

राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से फैसले पर दस्तखत किए जाने के बाद 60 दिन का नोटिफिकेशन भेज दिया गया है. जीएसपी समाप्त करने की यही वैध प्रक्रिया है. भारत और तुर्की के लगभग 2 हजार प्रोडक्ट हैं जो इसके प्रभाव में आएंगे. इनमें ऑटो पार्ट्स, इंडस्ट्रियल वॉल्व और टेक्सटाइल मैटीरियल प्रमुख हैं. राष्ट्रपति चाहें तो अपना फैसला वापस ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए भारत और तुर्की को अमेरिकी प्रशासन की चिंताओं को दूर करना होगा?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने कहा कि जीएसपी से भारत को बाहर करने का निर्णय राष्ट्रपति की घोषणा के जरिए ही अधिनियमित किया जा सकता है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, 2017 में भारत के साथ अमेरिकी वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार घाटा 27.3 बिलियन डॉलर था.बता दें कि अमेरिका के जीएसपी प्रोग्राम के तहत लाभ कमाने वाले दुनिया के बड़े देशों में भारत शुमार है. जीएसपी की भागीदारी अगर समाप्त होती है तो 2017 में पद संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप की यह सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी.


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