अचानक लाल बत्ती की दरकार क्यों, विश्लेष्णात्मक अध्ययन

Category: एडिटोरियल Written by वेदांत झा Hits: 1290

The अख़बार : छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार  लाल बत्ती का खेल क्यों खेलना चाहती है। कुछ नेताओ पर ही इतनी मेहज़रबानी क्यों फिलहाल छत्तीसगढ़ शासन पूर्ण बहुमत के आधार पर चल रही है। प्राप्त सूत्रों के अनुसार कुछ नेताओं को लाल बत्ती देना या देने के बारे में सोचना लोगो के दिमाक में कुछ समझ में नहीं आ रहा है, जबकि विरोधी पार्टी इस सुगबुगाहट से समझ नहीं रहे हैं की कुछ कद्दावर नेताओं को लालबत्ती देने से उनकी छवि बढ़ेगी या घंटेगी। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में तीन नेताओं का नाम आ रहा है। जिनमे सम्भवतः जगदलपुर के महापौर जतिन जयसवाल जी का भी नाम है जो कि शुरू से ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है। जिन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए लाल बत्ती का सहारा लेना पड़े वे स्वयं में ही लोगो की पसंद है  संभवतः पूरे बस्तर में उन्हें अपना परिचय देने की जरूरत पड़े उनका व्यक्तित्व मिलनसार, मृदुभाषी, सरल स्वभाव के धनी है।

विधानसभा दंतेवाड़ा के वरिष्ठ नेता श्री विमल सुराना का नाम कांग्रेस की पहचान के नाम से जाना जाता है। उनका जीवनकाल लगभग कांग्रेस की सेवा में ही बीत रहा है जनमानस की मानें तो उन्हें भी अपना परिचय देने के लिए लाल बत्ती कार का सहारा लेना पड़े। सुराना जी की अपनी एक अलग छवि है वे हमेशा से ही सक्रिय रहे हैं वे विरोधी पार्टी के भी आदरणीय हैं जिनकी स्वयं की पहचान है ।लगभग प्रत्येक व्यक्ति उनका सम्मान करता है लालबत्ती उनके लिए मिथया है। संभवतः लाल बत्ती की कार माननीय मनोज मण्डावी को भी मिल सकती है लेकिन वे भी अपने नाम पद आदि के मोहताज नहीं है, जबकि वे पूर्व में मंत्री पद का ईमानदारी से निर्वहन कर चुके हैं वे खुद स्वयं में लाल बत्ती का पावर रखते हैं।

सर्वविदित है 2017 में केंद्र सरकार ने वीआईपी कल्चर समाप्त करने के उद्देश्य से नेताओं और सांसदों की लाल बत्ती और नीली बत्ती पर रोक लगा दी थी जिसमें व्यथित होकर कुछ नेताओं ने  हूटर और सायरन  लगाना शुरू कर दिया जिसके कारण लोकसभा और विधानसभा में काफी विरोध हुआ।

जबकि सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हूटर और  साइरन का उपयोग फायर ब्रिगेड एंबुलेंस फालोगाड़ गाड़ी एवं चुनिंदा वाहनों में उपयोग किया जा सकता है।

विमल सुराना

मनोज मंडावी

जातीं जायसवाल

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