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अटल जी की भतीजी Karuna Shukla लड़ेंगी रमन सिंह के खिलाफ


The अख़बार:   पहले चरण के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने राजनांदगांव की बची छह सीटों पर भी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस द्वारा प्रत्याशियों की दूसरी सूची सोमवार को जारी कर दी गई.

 

(Congress पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज करेगी - Motilal Vora)




कांग्रेस ने राजनादगांव विधानसभा सीट से सीएम डॉ. रमन सिंह के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी Karuna Shukla को मैदान में उतारा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज Karuna Shukla ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया था.

पहले चरण के चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को नामांकन का आखिरी दिन है. इसे ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने प्रत्याशियों की दूसरी सूची सोमवार रात करीब पौने आठ बजे जारी कर दी.

इससे पहले कांग्रेस में टिकिट चयन को लेकर एक बार फिर बीते रविवार की देर रात बैठक हुई थी. होटल के बंद कमरे में हुई इस बैठक में प्रभारी पीएल पुनिया, भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव मौजूद थे.

Karuna Shukla 


कांग्रेस द्वारा जारी दूसरी सूची में राजनादगांव से Karuna Shukla, खैरागढ़ से गिरवर जंघेल, डोंगरगांव से दिलेश्वर साहू, डोंगरगढ़ से भुनेश्वर बघेल, खुज्जी से चन्नी साहू और मानपुर मोहला से इंद्र शाह मंडावी को उम्मीदवार बनाया गया है.

बता दें कि बस्तर संभाग की 12 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कांग्रेस पहले ही कर चुकी है. 

 

जाने Karuna Shukla के बारे में पूरी जानकारी - 

 

करुणा शुक्ला का जन्म 1 अगस्त 1950 को अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार में हुआ था. 32 साल भाजपा में रहने के बाद उन्होंने साल 2014 में अचानक कांग्रेस का दामन थाम लिया था. बताया जाता है साल 2014 के आम चुनाव में ​भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज करुणा शुक्ला ने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस का हाथ थाम लिया. यहीं से अटल की भतीजी कांग्रेस की 'करुणा' बन गईं. करुणा को कांग्रेस में लाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की अहम भूमिका बताई जाती है. भोपाल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद करुणा शुक्ला ने राजनीति में कदम रखा था.


करुणा शुक्ला मध्यप्रदेश विधानसभा में रहते हुए बेस्ट एमएलए का खिताब भी मिला था. 1982 से 2014 तक भाजपा में रहीं. करुणा 1993 में पहली बार विधानसभा सदस्य चुनी गईं. 2004 के लोकसभा के चुनावों में करुणा ने भाजपा के लिए जांजगीर सीट जीती थी, लेकिन 2009 के चुनावों में करुणा कोरबा सीट से कांग्रेस के चरणदास महंत से हार गईं थीं. पूरे छत्तीसगढ़ में करुणा ही भाजपा की एकमात्र प्रत्याशी थीं जो चुनाव हारी थीं. बाकी के राज्य की सभी सीटें भाजपा के खाते में गई थीं. भाजपा में रहते हुए करुणा कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं, जिनमें भाजपा महिला मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद भी है.

 


ये भी पढ़ें: Breaking News देखे BJP Candidate List 77 प्रत्याशियों की सूची



32 सालों तक भाजपा में रहीं करुणा शुक्ला अचानक चर्चा में तब आईं जब उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. चर्चा की सबसे बड़ी वजह ये है कि करुणा शुक्ला भाजपा के आधारपुरुष और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी हैं. कांग्रेस ने करुणा को छत्तीसगढ़ की बिलासपुर सीट से कांग्रस ने लोकसभा का प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे 1 लाख 76 से अधिक वोटों से भाजपा प्रत्याशी से हार गईं.

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